इस गाँव की है अलग ही कहानी

बैतूल मध्यप्रदेश के बैतूल जिले का बाचा गांव देश और दुनिया का पहला आदर्श गांव है, जहां हर घर में सोलर चूल्हे पर खाना पकता है. अपनी चमक जमा चुका ये गांव एक बार फिर सुर्खियों में है. अब यहां जल संरक्षण के लिए हर घर में जुगाड़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए सोखता गढ्ढा बनाए गए हैं. जिसमें छतों पर जमा बारिश का पानी सीधा इन गड्ढों में चला जाता है और ये पानी चंद घंटों में ही सीधे जमीन में चला जाता है. 74 घरों वाले बाचा गांव के 100प्रतिशत घरों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग बन चुके हैं और बचे हुए घरों में एक से दो दिनों में ये बना लिए जाएंगे.जमीन का जल स्तर बढ़ाने इस गांव के ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों में सोखता गड्ढा बनाएं हैं. जिनमें बारिश का जमा पानी छतों से पाइप और नालियों के जरिए इस गढ्ढे में जमा हो जाता है और चंद घंटों में ही यह पानी सीधे जमीन में उतर जाता है.यहाँ के लोगो का मानना है जैसे पानी के लिए शहरो में लाइन लगाते है और पानी ना मिलाने पर झगड़े तक हो जाते है वैसे हमारे गांव में ऐसी नौबत कभी नहीं आएगी जिसके लिए हमने पहले से ही सकता गद्दा पाना लिया है | पूरे देश का इकलौता सोलर विलेज बनकर सुर्खियों में आया बैतूल का गांव बाचा एक बार फिर अपने जल संरक्षण के काम को लेकर लोगो के बीच लोकप्रिय हो रहा है।अबके यहां आदिवासी ग्रामीणों ने हर घर मे जल संरक्षण के लिए सोख्ता गड्ढा बनाकर फिर देश दुनिया को पानी की कद्र करने की सीख दी है। 74 घरों के इस गांव में हर परिवार ने बारिश का पानी सहेजने के लिए अपने आंगन,बाड़ी में वाटर हार्वेस्टिंग की तर्ज पर सोख्ता गड्ढा बनाकर वर्षा जल को जमीन में भेजने की सरचनाये तैयार की है। खास बात यह है कि इन संरचनाओं के लिए न तो उन्होंने न तो कोई सरकारी मदद ली है और न अनुदान। स्वप्रेरणा से हर परिवार ने यहां दो से तीन मीटर लंबे,दो मीटर चौड़े और चार मीटर गहरे गड्ढे तैयार कर उन गड्ढो में बोल्डर,रेत,बजरी,गिट्टी,ईट भरकर उनमें वर्षा जल भरना शुरू किया है। कच्ची और खपरैल वाली इन छतों पर गिरने वाले बारिश के पानी को ग्रामीण नालियों की मदद से इन सोख्ता गड्ढो में भेजकर जमीन के अंदर वर्षा जल भेजकर अपने इलाके में भूजल स्तर बढ़ाने का जतन कर रहे है। खास बात यह है कि जिन घरों में इन सोख्ता गड्ढो को तैयार करने वाला कोई नही था। वहां ग्रामीण युवकों की टोली ने इन संरचनाओं को तैयार किया। इस प्रयास के साथ यह पूरा गांव अब जल संरक्षण के लिए भी मिसाल बन गया है। जहां हर घर मे सोख्ता गड्ढा भूजल को बढ़ाने का जतन कर रहा है।राजेन्द्र कवडे सरपंच और अनिल उइके ग्रामीण युवक ने बताया कि सभी घरों में सोक पिट तैयार कर लिए गए है और अब वर्षा जल इसमे संग्रहित किया जा रहा है। इस गांव को प्रेरणादायी बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले सोख पिट बनाने के लिए ग्रामीणों के प्रयास हर गांव के लिए मिसाल है।अगर हर गांव हर घर इस प्रणाली को अपना।ले।तो भूजल स्तर ऊपर उठाने बड़ी मदद मिलेगी। इससे गांव का पानी गांव में ही रुक सकेगा।